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Teachings of Sri Guru Arjan Dev Ji
Fifth Sikh Guru (1563 – 1606)
गुरु अरजन देव जी के महान उपदेश
श्री आदि ग्रंथ साहिब के संकलनकर्ता एवं प्रथम सिख शहीद
गुरु अरजन देव जी की शिक्षाएं
गुरु अरजन देव जी (1563 - 1606) ने 1604 ई. में आदि ग्रंथ साहिब का संकलन किया, श्री हरिमंदिर साहिब का निर्माण कराया और धर्म हेतु सर्वोच्च शहादत दी।
मुख्य ऐतिहासिक योगदान
आदि ग्रंथ साहिब का संकलन
1604 का ऐतिहासिक कार्य
गुरुओं, भक्तों और संतों की वाणी एकत्र कर आदि ग्रंथ का संपादन किया।
श्री हरिमंदिर साहिब का निर्माण
चार द्वार (सर्वधर्म समभाव)
सूफी संत मियां मीर जी से नींव रखवाई और चारों दिशाओं में द्वार बनाए।
सर्वोच्च शहादत
तेरा कीआ मीठा लागै
तप्त तवी पर बैठकर असीम धैर्य और ईश्वर की रज़ा का संदेश दिया।
मुख्य आध्यात्मिक सिद्धांत
सुखमनी साहिब की रचना
सुखमनी साहिब की रचना की जो मन को असीम शांति प्रदान करती है।
ईश्वर की रज़ा में प्रसन्नता
'तेरा कीआ मीठा लागै ॥ हरि नामु पदारथु नानकु मांगै ॥'
दसवंद प्रथा
कमाई का 10वाँ हिस्सा धर्म एवं सेवा हेतु दान करने का नियम बनाया।
2218 शब्द (SGGS)
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में सर्वाधिक 2218 पवित्र शब्द दर्ज हैं।