जगत गुरु नानक देव जी के उपदेश
सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की अमर शिक्षाएं एवं दिव्य विचार
गुरु नानक देव जी के मुख्य उपदेश
गुरु नानक देव जी (1469 - 1539) ने मानवता को भ्रातृत्व, एकता और सच्चे जीवन का मार्ग दिखाया। उनके द्वारा दिए गए सिद्धांत आज भी पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक हैं।
सिख धर्म के तीन मुख्य स्तंभ (Three Golden Pillars)
नाम जपो (Naam Japna)
ईश्वर का ध्यान करना
इक ओंकार वाहेगुरु जी के नाम का जाप करना, सिमरण करना और हर सांस में प्रभु की याद से जुड़े रहना।
किरत करो (Kirat Karo)
धर्म और ईमानदारी की कमाई
ईमानदारी, कठिन परिश्रम और सत्य की कमाई करना। धोखाधड़ी और बेईमानी से दूर रहना।
वंड छको (Vand Chhako)
जरूरतमंदों की सहायता एवं बांटना
अपनी कमाई में से जरूरतमंदों के साथ बांटकर छकना और समाज सेवा करना (दसवंद एवं लंगर सेवा)।
गुरु नानक देव जी के अन्य प्रमुख सिद्धांत
ੴ (इक ओंकार)
ईश्वर एक है, वह निर्भय, निर्वैर और सर्वव्यापी है। सभी मनुष्य उसी एक परमात्मा की संतान हैं।
मानवता की समानता
जाति-पाति, वर्ण और स्त्री-पुरुष के भेदभाव का पूर्ण खंडन। स्त्री जाति का सर्वोच्च आदर।
सत्य का जीवन (Truthful Living)
सत्य सबसे ऊंचा है, परंतु सत्यपूर्ण जीवन जीना उससे भी ऊंचा है।
निष्काम सेवा (Selfless Service)
बिना किसी स्वार्थ के मानवता और संगत की सेवा करना तथा अहंकार का नाश करना।